राजनीतिक दलों में ‘द केरल स्टोरी 2 – गोज बियॉन्ड’ को लेकर तीखी बहस छिड़ गई है। ट्रेलर लॉन्च के बाद विपक्ष इसे प्रोपेगेंडा का नया रूप बता रहा है, जो एक समुदाय के खिलाफ नफरत बोने का माध्यम है। कांग्रेस, पीडीपी, सपा और केरल नेताओं ने एकजुट होकर निंदा की है।
कांग्रेस विधायक गुलाम अहमद मीर ने कहा, ‘ऐसी फिल्में स्पॉन्सर्ड प्रोपेगेंडा हैं, जो खास विचारधारा थोपने का प्रयास करती हैं। जनता इनकी चाल समझ गई है।’
पीडीपी के आगा सैयद मुंतजिर मेहदी ने लंबे षड्यंत्र का पर्दाफाश किया। ‘दस बरसों से मुसलमानों को लक्ष्य बनाया जा रहा है। शिक्षा संस्थान बंद, हिंसक वारदातें और अब सिनेमा उद्योग से अपमान।’
निजामुद्दीन भट्ट ने चेताया, ‘संविधान के अधीन चलें तो विवाद कम होते। यह लोगों का ध्यान भटकाने और बंटवारे की साजिश है।’
केरल के वी. शिवनकुट्टी ने सफाई दी, ‘केरलवासी पहले भाग को खारिज कर चुके। यह सquel राज्य के उन्नयन कार्यों को कमजोर करने और बदनामी का उपक्रम है। हमारी सामाजिक व्यवस्था राष्ट्रीय विभाजनकारी धाराओं से मजबूत है।’
अबू आजमी ने खंडन किया, ‘हिंदुओं पर मुस्लिम हमले का दावा झूठा। जबरन विवाह या अपराध पर कानूनी सजा मिलती है। मौजूदा माहौल चिंतनीय है, संविधान ही रास्ता।’
2026 में 27 फरवरी को सिनेमाघरों में उतरेगी फिल्म, लेकिन विवाद पहले से ही चरम पर। सिनेमा और सियासत का यह गठजोड़ समाज के लिए खतरे की घंटी बजा रहा है।