मालेगांव डिप्टी मेयर कार्यालय की टीपू सुल्तान तस्वीर ने सियासी तूफान खड़ा कर दिया। एसपी विधायक अबू आजमी ने इसे संविधान विरोधी हिंदू-मुस्लिम राजनीति बताया। देश का इतिहास रानी लक्ष्मीबाई और टीपू जैसे नायकों से भरा है, संविधान सबको बराबर मानता है।
उन्होंने कहा कि टीपू जयंती पर पहले रोक लगी, लेकिन हाईकोर्ट ने 2024 में हरी झंडी दी। अंग्रेजों से लोहा लेने वाले टीपू ‘आजादी के मुजाहिद’ थे। मंदिर भंग करने के दावों पर उन्होंने तारीख और जगह बताने को कहा। उनके राज में इलाकों की समृद्धि ब्रिटेन से ऊपर थी, मंदिरों को अनुदान और रखरखाव दिया।
धार्मिक स्थानों पर हो रहे हमलों का खुलकर विरोध करते हुए आजमी ने एकता की बात की। कार्यालय में तस्वीर लगाना बुरा नहीं, यह व्यक्तिगत अधिकार है। बाबरी विध्वंस का जिक्र कर सरकार पर समाज बांटने का इल्जाम लगाया। भारत की पाकिस्तान पर क्रिकेट जीत को सलाम करते हुए शांति की अपील की।
आजमी का बयान इतिहास को राजनीतिक हथियार बनाने वालों के खिलाफ है, जो देश में सद्भाव चाहते हैं।