सीएफआर विशेषज्ञ की रिपोर्ट बांग्लादेश चुनावों से जेन-जी आंदोलन की सीमाएं बयान करती है। 2024 के छात्र प्रदर्शनों ने शेख हसीना को उखाड़ फेंका, एशिया में युवा शक्ति का प्रतीक बन गया। नेपाल से इंडोनेशिया और वैश्विक स्तर पर इसका प्रभाव फैला।
लेकिन कुर्लांट्जिक चेताते हैं—जेन-जी सड़कों पर राज करती है, मतपेटी में हार जाती है। थाईलैंड और जापान के उदाहरण स्पष्ट हैं। बांग्लादेश में बीएनपी की प्रचंड जीत हुई, प्रदर्शन नेताओं की पार्टी को ठुकरा दिया गया।
एनसीपी ने 30 सीटों पर संघर्ष किया, मात्र छह हासिल कीं। बीएनपी को संवैधानिक सुधारों और लोकतंत्र मजबूती के लिए चुना गया। क्या यह वादे पूरे करेगी? नाकामी से राजनीति वही रहेगी।
जमात-ए-इस्लामी की मजबूत स्थिति चिंता बढ़ाती है—हिंसा और कट्टरता का इतिहास। चुनाव पूर्व हत्याओं का सिलसिला चला। मतदान तो निष्पक्ष रहा, लेकिन जेन-जी को रणनीति बदलनी होगी।