प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को स्पष्ट किया कि बजट 2026 कोई विवशता का फैसला नहीं, बल्कि भारत की पूर्ण तैयारी का प्रतीक है। ‘हम तैयार हैं’ – यह भाव ही इस बजट का मूल मंत्र है।
उन्होंने जोर दिया कि उनके शासनकाल के बजट पारंपरिक हिसाब-किताब से कहीं आगे हैं। लाल किले के अपने पुराने उद्घोष को दोहराते हुए कहा कि ‘अब समय है’ का संदेश अब सरकारी नहीं, राष्ट्रीय विश्वास बन चुका है।
वैश्विक संकटों में भी भारत ने अपनी क्षमता सिद्ध की। पोस्ट-कोविड दुनिया में व्यापार व नवाचार के नए द्वार खुले हैं। हमारी युवा आबादी और नीतिगत स्थिरता इसे अवसरों का केंद्र बनाती है।
सरकार विकास, नियंत्रित मुद्रास्फीति और मजबूत अर्थव्यवस्था पर केंद्रित है। युवा स्पेस, ओलंपिक और स्टार्टअप्स में चमक रहे हैं। अमृत महोत्सव ने राष्ट्र निर्माण की चेतना जागृत की।
लोग अब समझते हैं कि विकसित भारत बनना बुनियादी सुविधाओं तक सीमित नहीं। सामाजिक व्यवहारों का परिवर्तन भी जरूरी है।
यह बजट 21वीं सदी के दूसरे चरण का प्रारंभिक दस्तावेज है। 2014 की प्रगति को मजबूत कर 25 वर्षों की लंबी छलांग की रूपरेखा खींचता है। ऐतिहासिक संदर्भ में, यह 1920 के निर्णयों जैसा है जो आजादी का आधार बने।
बजट अब रोडमैप हैं – योजना, समयबद्धता और निरंतरता के साथ। पिछली कमजोरियों को सुधारा, समावेशी विकास सुनिश्चित किया। ‘यह हमारी रिफॉर्म यात्रा का अगला पड़ाव है, जो युवाओं को वैश्विक चुनौतियों के लिए तैयार करेगा।’