रायपुर से सटे नक्सली इलाके में मोहभट्टा के चिंताराम नायक ने साबित कर दिया कि सही योजना से किसानी फायदेमंद बन सकती है। नाबार्ड की सौर सुजला योजना से मिले सोलर सिंचाई पंप ने उनकी सात एकड़ खेत को सोने की चिड़िया बना दिया। आय दोगुनी होने से परिवार का भविष्य संवर गया।
विविध फसलें उगाकर चिंताराम ने खेती को लाभकारी बनाया। रबी का धान, खरीफ का मक्का-सर्सों-दालें, ग्रीष्म का गेहूं-चना। चक्र प्रणाली से जमीन उपजाऊ बनी रहती है, पानी कम लगता है। प्राकृतिक खाद से फसलें बाजार में छाई हुई हैं।
चिंताराम कहते हैं, ‘पहले पानी की मार से खेती चौपट हो जाती। अब सोलर पंप से हर मौसम में सिंचाई।’ उपज दूर-दराज बाजारों तक पहुंच रही, दाम भी अच्छे। इस बदलाव ने आर्थिक मजबूती दी।
गांव वाले भी इस राह पर चल पड़े। सौर सिंचाई वैज्ञानिक खेती के साथ मिलकर क्षेत्र में कृषि क्रांति ला रही। यह योजना न सिर्फ आय बढ़ा रही, बल्कि पर्यावरण संरक्षण भी सुनिश्चित कर रही है। ग्रामीण विकास की ऐसी मिसालें प्रेरणा स्रोत हैं।