एआई इम्पैक्ट समिट नई दिल्ली में होने को है, इस मौके पर रुब्रिक के सीईओ विपुल सिन्हा ने एआई को प्रगति का द्वार बताया, न कि संकट का।
विशेष साक्षात्कार में उन्होंने भारत की तैयारी की तारीफ की। ऊर्जा, कम्प्यूटिंग व बुद्धिमान एजेंट्स पर फोकस कर देश एआई को वास्तविकता में बदल रहा। एआई सिर्फ तकनीक नहीं, बल्कि व्यापार व प्रक्रियाओं में घुलमिल जाना इसका लक्ष्य।
पुराने सम्मेलनों के विपरीत, यह आयोजन संभावनाओं पर जोर देगा। भारत का तकनीकी मानव संसाधन व इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश इसे अप्लाइड एआई में विश्व गुरु बना सकता है।
जोखिम स्वाभाविक, लेकिन फायदे कहीं अधिक। डिजिटल क्रांति की तर्ज पर एआई सामान्य जन को सशक्त कर सकता है।
नौकरियों पर आशंका बढ़ा-चढ़ाकर कही जा रही। इतिहास गवाह है—कृषि, उद्योग, ज्ञान के बाद अंतर्ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था नई संभावनाएं खोलेगी। मॉडल डेवलपमेंट सीमित, डिप्लॉयमेंट के लिए व्यापक टीम जरूरी।
यूएस मॉडल में आगे, चीन उसके बाद, भारत प्रैक्टिकल एआई में। चिप निर्माण, जीपीयू व डेटा सेंटर्स पर सरकारी कदम स्वागतयोग्य। साझेदारियां व छूट भारत को वैश्विक केंद्र बना देंगी।
‘लोग, पर्यावरण, प्रगति’ पर फोकस—रिस्किलिंग, ऊर्जा, समावेशिता। भारत का आकार व गति अमेरिकी निवेश खींच रही, जो स्वदेशी निर्माण व किफायती दाम सुनिश्चित करेगी।
समाज के हर तबके को एआई लाभ मिले, विकासशील देश अछूते न रहें। चिकित्सा व शिक्षा में बड़ा योगदान, सुरक्षित तरीके से। एआई जानकारी मुहैया करे, गहराई मीडिया दे।
विश्व पटल पर एआई शासन, खपत व असर पर चर्चा के बीच यह समिट भारत को अप्लाइड एआई का मजबूत आधार देगा।