हरिद्वार की पावन धरती पर महाशिवरात्रि की रौनक चरम पर पहुंच गई है। दक्षेश्वर महादेव जैसे प्रसिद्ध शिवालयों में देश-प्रदेश से लाखों भक्त दर्शन-पूजन को पहंचे हैं। खास ज्योतिषीय संयोग से इस बार उत्साह दोगुना है—कुंभ में पांच ग्रहों की युति जो तीन शताब्दियों बाद घटी है। पूजा से मनोकामनाएं पूर्ण होने का विश्वास भक्तों में जोश भर रहा है।
प्रातःकाल से ही मंदिर क्षेत्र जयकारों से मुखरित है। जलाभिषेक के लिए कतारें सजी हैं, भक्त बेलपत्र-दूध लेकर बारी का इंतजार कर रहे। सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद है, पुलिस और वॉलंटियर्स सक्रिय हैं ताकि कोई परेशानी न हो।
महंत रविंद्र पुरी ने शुभकामनाएं देते हुए कहा, यह शिव की ससुराल है जहां सती का अवतरण हुआ। फाल्गुन रात्रि चार मुख्य पर्वरात्रियों में प्रमुख है। शिव-पार्वती का मिलन प्रकृति के संनाद का प्रतीक है, मां पार्वती भक्तों पर कृपा लुटा रही हैं।
देहरादून के टपकेश्वर में भी वैसा ही नजारा। द्रोणाचार्य की साधना से बने इस गुफा मंदिर में शिव प्रकट हुए थे। पुजारी बोले, भारत देवभूमि है, राम-कृष्ण की लीला से पावन। महाशिवरात्रि सनातन आस्था की धरोहर को मजबूत कर रही है, पूरे देश में भक्ति का अलख जगा रही।