मोदी कैबिनेट का बड़ा फैसला: एक लाख करोड़ रुपये के शहरी चुनौती कोष को मंजूरी। यह कदम अनुदान से हटकर बाजार-आधारित विकास की नई सोच लाता है। कुल सहायता एक लाख करोड़, लेकिन परियोजना का 50 प्रतिशत बाजार (बंध, ऋण, पीपीपी) से आएगा। केंद्र 25 प्रतिशत योगदान देगा, जिससे पांच साल में चार लाख करोड़ का निवेश होगा।
यूसीएफ वित्त वर्ष 2025-26 से चलेगा, 2030-31 तक, विस्तार संभव। लक्ष्य: जलवायु-सहिष्णु, समावेशी शहर जो अर्थव्यवस्था चलाएं। चुनौती-आधारित चयन में सुधारों पर जोर—शासन, वित्त, दक्षता, नियोजन।
छोटे शहरों के लिए 5,000 करोड़ का कोष और गारंटी योजना। पूर्वोत्तर- पहाड़ी इलाकों में पहली ऋण पर 70%/7 करोड़ गारंटी, बाद में 50 प्रतिशत। न्यूनतम 20 करोड़ की शुरुआती परियोजनाएं।
फोकस क्षेत्र: आर्थिक नोड्स, पारगमन विकास, ब्राउनफील्ड पुनरुद्धार, जल-सीवरेज, कचरा प्रबंधन। डिजिटल प्लेटफॉर्म से ट्रैकिंग, केपीआई-आधारित मूल्यांकन। निजी निवेश को सक्षम बनाएगा। शहरी क्रांति का आधार तैयार।