भारत के विरुद्ध पाकिस्तान का प्रॉक्सी युद्ध जारी है, क्योंकि जिम्मेदार वैश्विक संस्थाएं चुप हैं। नई रिपोर्ट उजागर करती है कि कैसे जैश-ए-मोहम्मद यूएन बैन के बावजूद पहलगाम से लाल किले तक हमले कर रहा।
पूर्व अधिकारी नीलेश कुंवर की यूरेशिया रिव्यू रिपोर्ट यूएनएससी 1267 कमेटी की नाकामी बयान करती है। 37वीं रिपोर्ट जेईएम को 2025 के दो बड़े हादसों से जोड़ती है—पहलगाम कांड और दिल्ली के लाल किले कार बम। महिला जिहादी इकाई जमात-उल-मुमिनात का जिक्र भी। लेकिन समिति सदस्यों के फीडबैक पर निर्भर, जांचहीन रिपोर्ट जारी करती है—बस ‘कागजी शेर’।
पाकिस्तान के झूठे दावों के उलट, ऑपरेशन सिंदूर ने जेईएम को करारा जवाब दिया। बहावलपुर हमले से मुख्यालय ध्वस्त, असंतोष फैला। अजहर का कबूलनामा सबूत है।
पिछले नवंबर फरीदाबाद अल फलाह से डॉक्टरों वाला टेरर नेटवर्क पकड़ा गया, जो 10 नवंबर लाल किले प्लॉट से जुड़ा। जेईएम की साजिशें जारी।
सलाह साफ: आतंकवाद विरोधी तंत्र सशक्त करें, मिलिट्री के साथ डिप्लोमेसी-आर्थिक दबाव डालें। कमजोर यूएन रिपोर्टें भी भारत को फायदा देती हैं, पाक के झूठ काटती हैं।
दुनिया की चुप्पी खत्म हो। भारत की कार्रवाइयां मिसाल हैं, लेकिन वैश्विक एकजुटता से ही प्रॉक्सी खतरा समाप्त होगा।