रूस ने ब्रिक्स को सैन्य गुट में बदलने के किसी भी प्रयास को सिरे से नकार दिया है। उप विदेश मंत्री सर्गेई रयाबकोव ने तास एजेंसी को शनिवार को बताया कि यह आर्थिक मंच कभी सैन्य गठबंधन या सामूहिक रक्षा संगठन नहीं बनेगा।
रयाबकोव ने स्पष्ट किया, ‘इसकी कल्पना ही कभी ऐसी नहीं की गई और भविष्य में भी ऐसा नहीं होगा।’ 10 देशों वाले इस समूह में सैन्य ड्रिल या शस्त्र नियंत्रण का कोई स्थान नहीं है।
दक्षिण अफ्रीका के हालिया नौसैनिक युद्धाभ्यास ‘विल फॉर पीस 2026’ को ब्रिक्स से जोड़ने की कोशिशों को भी खारिज करते हुए उन्होंने कहा कि रूस, चीन, ईरान ने व्यक्तिगत रूप से भागीदारी की थी।
ब्लॉक के जहाजों को हमलों से बचाने की क्षमता न होने पर रयाबकोव ने माना कि यह आपूर्ति श्रृंखला मजबूत करने और पाबंदियों का मुकाबला करने तक सीमित है। सुरक्षा के अन्य रास्ते तलाशने होंगे।
ब्रिक्स की शुरुआत 2009 में ब्राजील, रूस, भारत, चीन से हुई, जिसमें 2010 में दक्षिण अफ्रीका आया। वर्तमान में 11 सदस्य (मिस्र, सऊदी, यूएई, इथियोपिया, इंडोनेशिया, ईरान सहित) और 10 साझेदार हैं। सदस्यों के बीच व्यापार की रफ्तार वैश्विक स्तर से कहीं आगे है।
ईरान को समर्थन देते हुए रयाबकोव ने रूस-चीन की भूमिका का जिक्र किया, जो तेहरान-वॉशिंगटन संवाद के लिए अरब मध्यस्थता सहित अप्रत्यक्ष रास्ते सुगम बना रहे हैं। ब्रिक्स इन वार्ताओं पर ध्यान केंद्रित कर रहा है।