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    Home»Business»अमेरिका-चीन तनाव के बीच भारत यूरोप कनाडा का तीसरा स्तंभ बन रहा
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    अमेरिका-चीन तनाव के बीच भारत यूरोप कनाडा का तीसरा स्तंभ बन रहा

    Indian SamacharBy Indian SamacharFebruary 14, 20262 Mins Read
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    यूरोप
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    वैश्विक पटल पर अमेरिका, चीन व रूस के टकराव तेज होने से यूरोप व कनाडा भारत को रणनीतिक साझीदार के रूप में तेजी से अपनाने को उत्सुक। नई रिपोर्ट भारत को ‘तीसरा ध्रुव’ घोषित कर रही, जो विश्व व्यवस्था में संतुलन ला सकता।

    तीनों धुरियों से बनी उलझनों ने यूरोपीय संघ व कनाडा को भारत के साथ गठबंधन मजबूत करने को बाध्य किया। भारत चीन-जैसे वैचारिक बोझ से निष्कलंक, लेकिन भारी भरकम क्षमता सम्पन्न।

    यह अमेरिकी सुरक्षा जाल या चीनी मैन्युफैक्चरिंग का दुहराव नहीं, तथापि विखंडित वैश्विक व्यापार में तीसरा केंद्र बनने को तैयार। बढ़ता उत्पादन, कम मजदूरी लागत, बेहतर विधि-व्यवस्था, तकनीकी प्रतिभा व घरेलू मांग इसे सशक्त बनाती।

    अमेरिका की अनिश्चितताओं व चीन निर्भरता की जोखिमों से बचने को ये देश व्यापार समझौते व रक्षा तकनीक साझेदारी को प्राथमिकता दे रहे। भारत पर रूस तेल खरीद का अमेरिकी दबाव यूरोप के比 में सीमित।

    यूरोपीय नेता बीजिंग की यात्राओं में व्यस्त, बाजार सुरक्षित करने को। मगर घरेलू आलोचना बढ़ रही—चीन से ‘डि-रिस्किंग’ की बातें, चेन कमजोरियां, राष्ट्रीय खतरे व रुस-पाक गठजोड़ पर।

    मानवाधिकार वोटर दबाव से सरकारें सतर्क, व्यापार पर लोकतंत्र न कुर्बान हो। राजनीतिक रूप से महंगा पड़ सकता। भारत लोकतांत्रिक मजबूती के साथ वैश्विक संतुलन का नया केंद्र बन रहा।

    Canada strategic partnership China de-risking Defense tech collaboration Europe India ties Global Geopolitics India manufacturing boom India third pole US China Russia tensions
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