केंद्रीय कैबिनेट ने एक लाख करोड़ रुपये के शहरी चुनौती कोष को मंजूरी प्रदान कर शहरी विकास को नई गति दी है। पीएम मोदी के नेतृत्व में लिया यह फैसला बाजार-आधारित वित्तपोषण से उच्चस्तरीय इन्फ्रास्ट्रक्चर पर जोर देगा, जिससे शहर आर्थिक प्रगति के प्रमुख केंद्र बनेंगे।
यूसीएफ निजी निवेश, सार्वजनिक-निजी साझेदारी और सुधारों के दम पर जलवायु-सहिष्णु, समावेशी शहर गढ़ेगा। केंद्रीय सहायता परियोजना लागत का 25 प्रतिशत होगी, यदि न्यूनतम 50 प्रतिशत बाजार से आए। पांच वर्षों में चार लाख करोड़ का निवेश आकर्षित करेगा यह कोष।
कार्यान्वयन 2025-26 से शुरू होकर 2030-31 तक चलेगा, विस्तार संभव 2033-34 तक। बजट की शहर पुनर्विकास, जल-स्वच्छता योजनाओं को बल मिलेगा। चयन प्रक्रिया प्रभाव, टिकाऊपन और सुधार-उन्मुखीकरण पर आधारित रहेगी।
सुधारों की निरंतरता फंड जारी करने की शर्त होगी। मंत्रालय का एकल पोर्टल पारदर्शी, डिजिटल ट्रैकिंग प्रदान करेगा। तेजी से शहरीकरण के दौर में यह कोष बुनियादी सुविधाओं को मजबूत कर रोजगार सृजन और समृद्धि लाएगा, शहरों को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा।