पाकिस्तानी सेना प्रमुख असीम मुनीर को यूरोप के प्रमुख ग्लोबल सिक्योरिटी फोरम में निमंत्रित किए जाने पर जेय सिंध मुत्तहिदा महाज के नेता शफी बुरफत ने तीखा विरोध जताया। इसे उन्होंने दक्षिण एशिया के उत्पीड़ित समुदायों के साथ विश्वासघात बताया।
बुरफत के अनुसार, मुनीर ने पाकिस्तान को सैन्य तानाशाही में बदल दिया है, जहां राजनीति से लेकर मीडिया तक सब कुछ आर्मी के इशारे पर नाचता है। म्यूनिख जैसे सम्मेलनों में उनकी उपस्थिति उन निर्दोषों का अपमान है जो पाकिस्तान में जुल्म की चपेट में हैं।
एक्स पर पोस्ट में बुरफत ने खुलासा किया कि मुनीर के नेतृत्व में सिंध, बलूचिस्तान और पश्तून इलाकों में जबरन गायब करने, अमानवीय यातनाएं और हत्याओं का सिलसिला जारी है। कार्यकर्ताओं को उठाकर टॉर्चर किया जाता है और उनके लाशें सड़कों पर फेंककर भय का राज कायम किया जाता है।
13-15 फरवरी को होने वाले आयोजन पर संयुक्त राष्ट्र और अन्य वैश्विक निकायों को पत्र भेजकर बुरफत ने पाक सैन्य नेतृत्व को मंच देने का विरोध किया। क्षेत्र में सियासी दबाव, सांस्कृतिक दमन और आर्थिक शोषण की घटनाएं बढ़ रही हैं।
पाकिस्तान के बिन लादेन को शरणागत बनाने से उसकी अंतरराष्ट्रीय छवि धूमिल हुई है, जिससे आतंकवाद विरोधी वादों पर शक गहरा गया। बुरफत ने चेतावनी दी कि ऐसे न्योते शांति मंचों की साख को ठेस पहुंचाते हैं।
म्यूनिख कॉन्फ्रेंस, जो लोकतंत्र और मानवता के मूल्यों पर जोर देता है, को पाकिस्तानी सेना के काले कारनामों को नजरअंदाज न करने की हिदायत दी गई। यह घटना पाकिस्तान के अंदरूनी संघर्षों को वैश्विक बहस का केंद्र बना रही है।