प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने असम के मोरन में एक क्रांतिकारी परियोजना का आगाज किया, जो पूर्वोत्तर भारत को हवाई आपात स्थिति में नई मजबूती देगी। डिब्रूगढ़ जिले के नेशनल हाईवे पर बनी यह पहली इमरजेंसी लैंडिंग सुविधा (ईएलएफ) वायुसेना के लिए रणनीतिक खजाना साबित होगी।
कार्यक्रम स्थल पर वायुसेना के विमान से उतरते ही पीएम का स्वागत सीएम हिमंत बिस्वा सरमा और सांसद सर्बानंद सोनोवाल ने किया। उसके बाद राफेल, सुखोई-30 और मिग-29 जैसे घातक विमानों ने हाईवे पर साहसिक प्रदर्शन किया, जिसे एक लाख से ज्यादा दर्शकों ने सराहा।
एयर चीफ मार्शल एपी सिंह की प्रस्तुति में बताया गया कि यह 4.2 किमी की स्ट्रिप 40 टन लड़ाकू और 74 टन ट्रांसपोर्ट विमानों को आसानी से हैंडल कर सकती है। बिना डिवाइडर का डिजाइन लैंडिंग को सरल बनाता है, जबकि चीन सीमा से निकटता इसे सीमापार चुनौतियों के खिलाफ हथियार देती है।
यह ईएलएफ पूर्वोत्तर की सैन्य तैयारी को नई ऊंचाई देगी, जहां तनावपूर्ण माहौल में त्वरित प्रतिक्रिया जरूरी है। सिविल उपयोगिता के साथ सैन्य मजबूती का यह मिश्रण सरकार की दूरदर्शिता दर्शाता है। मोरन अब सुरक्षा का नया केंद्र बनेगा, जो क्षेत्र को मजबूत विकास की राह दिखाएगा।