पुणे में आयोजित कार्यक्रम में संजीव सान्याल ने आईएनएसवी कौंडिन्य को जोखिम लेने वाली भारतीय संस्कृति के पुनरुद्धार का प्रतीक बताया। पीएम की आर्थिक सलाहकार परिषद के सदस्य ने कहा कि हमारा लक्ष्य ऐसी साहसिक मानसिकता विकसित करना था, जो असफलता के भय से ऊपर उठे।
उन्होंने खुलासा किया कि यह प्रोजेक्ट प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को प्रस्तुत एक साधारण आइडिया से शुरू हुआ। लेकिन इसे हकीकत बनाना हर स्तर पर दांव लगाने जैसा था। एक अर्थशास्त्री के नेतृत्व में समुद्री जहाज बनाना सभी के लिए हैरानी का विषय था, खासकर जब डिजाइन सिर्फ काल्पनिक चित्रों तक सीमित था।
रास्ते में कई गलतियां हुईं, जिनसे सबक मिले। लॉन्च के समय तनाव चरम पर था – क्या यह डूब जाएगा? समुद्र परीक्षण में विशेषज्ञ नाविकों को पुरानी शैली अपनानी पड़ी।
सान्याल ने स्पष्ट किया कि हर नवाचार में शारीरिक खतरा, मानसिक चुनौती और सम्मान का दांव लगा होता है। चाहे स्टार्टअप हो या वैज्ञानिक खोज, जोखिम लेना अनिवार्य है। ऐसी क्षमता वाली सभ्यताएं ही इतिहास रचती हैं। यह जहाज भारत को नई ऊंचाइयों की ओर ले जाने का संदेश देता है।