ओला इलेक्ट्रिक ने वित्त वर्ष 26 की तीसरी तिमाही (अक्टूबर-दिसंबर) के नतीजे पेश किए, जिसमें राजस्व में गहरी गिरावट दर्ज की गई। परिचालन आय 55 प्रतिशत कम होकर 470 करोड़ रुपये पर आ गई, जबकि कुल आय 57 प्रतिशत घटकर 504 करोड़ रुपये रही। पिछले साल की समान तिमाही में ये आंकड़े क्रमशः 1,045 करोड़ और 1,172 करोड़ रुपये थे।
घाटा 487 करोड़ रुपये का रहा, जो तिमाही आधार पर बढ़ा लेकिन सालाना थोड़ा कम। कुल व्यय 51 प्रतिशत घटकर 741 करोड़ रुपये हो गया, जिसमें सामग्री लागत 74 प्रतिशत कम होकर 223 करोड़ रुपये पर सेट हो गई। इससे स्पष्ट है कि उत्पादन गति धीमी पड़ी है।
शेयरों पर दबाव बढ़ा, जो 30.41 रुपये के 52-सप्ताह निचले स्तर पर पहुंचे और 30.9 रुपये पर बंद हुए। पिछले एक साल में 51.90 प्रतिशत और यूटीनाउ 17.59 प्रतिशत की हानि। कंपनी ने छंटनी शुरू की है, जिसमें 5 प्रतिशत स्टाफ प्रभावित होगा।
फोकस अब सेवा सुधार पर है। हाइपरसर्विस मॉडल से देशभर में 80 प्रतिशत से अधिक सर्विस रिक्वेस्ट उसी दिन सुलझ रही हैं। मुश्किल दौर में ओला को मजबूत रणनीति से उबरना होगा।