नीति आयोग की ताजा रिपोर्ट भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात की चमकदार कहानी बयान करती है। जुलाई-सितंबर 2025-26 की ‘ट्रेड वॉच क्वार्टरली’ में बताया गया कि 2015-24 के बीच भारत का वैश्विक हिस्सा 17.2% सीएजीआर से उछला, जबकि विश्व औसत 4.4% रहा। मोबाइल निर्यात मुख्य वजह।
2016-24 में निर्यात 5 गुना होकर 42.1 बिलियन डॉलर पहुंचा। 4.6 ट्रिलियन के बाजार में मोबाइल, कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स, टेलीकॉम उत्पाद अमेरिका-यूके-यूएई जा रहे।
दूसरा सबसे बड़ा निर्यात क्षेत्र बन चुका यह ऑटो, रिन्यूएबल्स, टेलीकॉम, डिफेंस से जुड़ा आर्थिक इंजन है।
अब कंपोनेंट्स पर फोकस, 40,000 करोड़ की बजट योजना सहारा।
सप्लाई चेन मजबूत करने को पीसीबी, चिप असेंबली, पावर सिस्टम, एम्बेडेड टेक बढ़ाएं। लॉजिस्टिक्स, टैक्स, स्किल्स सुधारें।
सुमन बेरी बोले- इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग की रीढ़। ट्रेड बैलेंस, स्वावलंबन देता। असेंबली अच्छी, लेकिन कॉस्ट कट, लोकल पार्ट्स, इन्वेस्टमेंट चाहिए।
ग्लोबल ट्रेड सुस्त, सर्विसेज ठीक। Q2 निर्यात +8.5%। डेवलपिंग ट्रेड 4x। ई-कॉमर्स टॉप-6, इलेक्ट्रॉनिक्स 50%।