निवेश के क्षेत्र में म्यूचुअल फंड की लोकप्रियता बुलंदियों पर है। डिजिटल प्लेटफॉर्म्स ने इसे और आसान बना दिया है। मगर रिटर्न के आंकड़ों के पीछे भागते हुए एक्सपेंस रेशियो को नजरअंदाज न करें, जो चुपचाप आपकी पूंजी खा सकता है।
फंड मैनेजमेंट में कई प्रकार के व्यय होते हैं—मैनेजर फीस, ट्रेडिंग शुल्क, प्रशासनिक खर्चे, प्रचार-प्रसार, सेवा प्रदाताओं की फीस और जांच-पड़ताल। इनका योगफल टीईआर कहलाता है, जो एयूएम का हिस्सा बनकर एनएवी से घटाया जाता है।
यह कुल खर्च को संपत्ति से विभाजित कर 100 गुणा करने पर निकलता है। नियामक सेबी आकार के आधार पर सीमा लगाता है: छोटे इक्विटी पर 2.25%, विशाल फंड पर न्यूनतम। इंडेक्स फंड सस्ते पड़ते हैं।
डायरेक्ट बनाम रेगुलर प्लान का फर्क समझें। डायरेक्ट में एजेंट कमीशन बचता है, खर्च कम। 10 लाख का निवेश 12% पर 30 वर्षों में डायरेक्ट से 3 करोड़, रेगुलर से काफी कम।
फिर भी, केवल सस्ता फंड न लें। प्रदर्शन, जोखिम प्रोफाइल, निवेश संरचना और प्रबंधन टीम की क्षमता का मूल्यमापन जरूरी। एक्सपेंस रेशियो को समझकर सही फैसला लें, वित्तीय भविष्य सुरक्षित करें।