बांग्लादेश में गुरुवार को संपन्न 13वें आम चुनाव के नतीजों ने महिलाओं की राजनीतिक ताकत का लोहा मनवा दिया। 284 सीटों की गिनती में बीएनपी गठबंधन ने 208 पर कब्जा जमाया, जिससे सरकार गठन का रास्ता साफ हो गया। इस बार चुनाव में महिलाओं की भूमिका सबसे बड़ा मुद्दा रही।
महिला प्रत्याशियों की संख्या कम होने के बावजूद सात ने कमाल कर दिखाया। बीएनपी की अफरोजा खान रीता (मानिकगंज-3), इसरत सुल्ताना एलेन भुट्टो (झालोकाटी-2), तहसीना रुशदिर लूना (सिलहट-2), शमा ओबैद (फरीदपुर-2), नायाब यूसुफ कमाल (फरीदपुर-3) और फरजाना शर्मिन पुतुल (नटोरे-1) विजयी हुईं। ब्राह्मणबरिया-2 से स्वतंत्र उम्मीदवार रूमिन फरहाना ने भी सफलता पाई।
प्रचार के मैदान में इन योद्धाओं को बदनामी, ऑनलाइन ट्रोलिंग और जान से मारने की धमकियां मिलीं। लेकिन बीएनपी का नारा था- महिलाओं का विकास ही देश का विकास।
जमात-ए-इस्लामी की टिप्पणी ने आग में घी डाला। उनके नेता का पोस्ट महिलाओं को घर से बाहर निकलने पर नैतिक पतन का शिकार बताता था। वायरल होने के बाद हटाया गया, लेकिन बहस तेज हो गई। पार्टी ने जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ा।
खालिदा जिया और शेख हसीना जैसी नेत्रियों ने बांग्लादेश को वैश्विक पटल पर स्थापित किया। जमात का एजेंडा मतदाताओं ने नकार दिया। नई सरकार में महिलाओं को मिली ये सीटें समानता की नई मिसाल कायम करेंगी।