महाशिवरात्रि की धूम 15 फरवरी को पूरे देश में छाएगी। इस पावन रात्रि पर कैलाश खेर का ‘अगड़ बम शिव लहरी’ शिव-पार्वती के रिश्ते को संगीतमय रूप देता है। लेकिन इसकी जड़ें एक लंबे भक्ति गीत में हैं, जिसे 12 मिनट से अधिक समय का बंसी जोगी ने प्रस्तुत किया—हरियाणा और यूपी के लोक संगीतकार जिनकी आवाज शिव भक्ति की मिसाल थी।
बंसी जोगी के 1990 के दौर के गीत जैसे ‘अगड़ बम बम लहरी’, ‘भांग रगड़ के’ और अन्य ने लाखों को मंत्रमुग्ध किया। अपनी ‘बंसी जोगी एंड पार्टी’ से उन्होंने देसी वाद्यों पर जोर दिया। 1995 का उनका संस्करण कैलाश के गाने का आधार बना। गीत शिव के अघोरी स्वरूप का वर्णन करता है, पार्वती के प्रेम से विवाह तक की कथा सुनाता है।
विवाहोत्सव में ब्राह्मणों को तीन मुट्ठी राख दान का रोचक प्रसंग है। राख वैभव, विद्या और आनंद का प्रतीक बनी, लालची ब्राह्मणों ने उसे पानी में मिला दिया। नदी सोना-चांदी उगलने लगी, लेकिन लोभ में सब व्यर्थ। यह कथा नैतिक शिक्षा देती है।
आज खेर का संस्करण लोकप्रिय है, पर बंसी का पूरा भजन भक्ति की सच्ची थाती है। महाशिवरात्रि पर इसे सुनकर शिव महिमा का वास्तविक आनंद लें।