मुंबई में मंत्रालय की चहल-पहल के बीच एसीबी ने एक सनसनीखेज कार्रवाई को अंजाम दिया। एफडीए में तैनात क्लर्क राजेंद्र धेरंगे को 35 हजार रुपये रिश्वत लेते हुए धर लिया गया। यह घटना गुरुवार को घटी और शुक्रवार को ब्यूरो ने जानकारी साझा की।
क्लर्क ने मेडिकल लाइसेंस रिन्यूअल के नाम पर शिकायतकर्ता से 50 हजार रुपये वसूलने की कोशिश की। शिकायत मिलते ही एसीबी ने ट्रैप सेट किया। दूसरी मंजिल के एफडीए दफ्तर में क्लर्क को नकद रकम लेते पकड़ा गया।
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने इसे महायुति सरकार की नाकामी करार दिया। उन्होंने दावा किया कि मामला कैबिनेट मंत्री के ऑफिस से जुड़ा है और सीएम को दोषी मंत्री हटाना चाहिए। सपकाल ने कहा कि भ्रष्टाचार ने प्रशासन को जकड़ लिया है।
एसीबी अधिकारियों ने पुष्टि की कि गिरफ्तारी एफडीए प्रांगण में हुई। भ्रष्टाचार विरोधी कानून के तहत मुकदमा दर्ज है, जांच जारी।
विपक्ष का कहना है कि मंत्रालय में खुला रिश्वत का खेल चल रहा है, जहां बिना कमीशन के फाइलें नहीं चलतीं। उन्होंने मुख्यमंत्री से जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग उठाई।
ब्यूरो ने जनता से आह्वान किया कि भ्रष्टाचारियों की शिकायत दर्ज कराएं। यह मामला महाराष्ट्र के नौकरशाही तंत्र में सुधार की आवश्यकता को रेखांकित करता है।