वह भारी-भरकम रेडियो बॉक्स, जिसकी सुई घुमाने से दुनिया के कोने-कोने की आवाजें आ जातीं। टाइटैनिक के डूबते जहाज से एसओएस भेजकर रेडियो ने इतिहास रचा। 13 फरवरी को विश्व रेडियो दिवस पर हम इस जादुई माध्यम की यात्रा का जश्न मना रहे हैं।
स्पेनिश विशेषज्ञ जॉर्ज अल्वारेज के 2010 के विचार को यूनेस्को ने 2011 में स्वीकृति दी, जो संयुक्त राष्ट्र रेडियो के स्थापना दिवस पर था। यह रेडियो की सूचना शक्ति को सम्मानित करता है।
देश में आकाशवाणी का जलवा है। टैगोर द्वारा नामित 1936 की एआईआर ने आजादी की लड़ाई से आधुनिक भारत तक साथ दिया। पांडे जी की गंभीर आवाज और सयानी साहब की बिनाका गीतमाला ने रेडियो को सुपरहिट बनाया।
‘मन की बात’ ने इसे नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया। आने वाला ‘वेव्स’ ओटीटी प्लेटफॉर्म रेडियो को डिजिटल दुनिया में ले जाएगा।
कризिस में रेडियो अटल रहता है। ग्रामीण रेडियो बाढ़-तूफान की खबरें स्थानीय बोली में देते हैं। एआई स्क्रिप्ट लिखे, लेकिन दिल की बात इंसान ही कहेगा। रेडियो का जादू बरकरार!