तिरुवनंतपुरम। चार दशक पुराने भूमि आवंटन विवाद में केरल हाईकोर्ट ने राज्य को अंतिम चेतावनी दी है। दो हफ्ते में जवाब न देने पर सख्त कार्रवाई की बात कही गई है। मामला केरल यूनिवर्सिटी की जमीन को 1977 में एकेजी सेंटर के लिए देने का है, जो सीपीआई-एम का पुराना राज्यालय रहा।
सीजेएस सौमेन सेन और जस्टिस श्याम कुमार की बेंच ने याचिका पर सुनवाई की, जिसमें पूर्व रजिस्ट्रार ने आवंटन की कानूनीता पर उंगलियां उठाईं। एके एंटनी के सीएम काल का सरकारी आदेश गायब है और जमीन का क्षेत्रफल दोगुना से अधिक हो गया।
सरकार के वकील ने दस्तावेज तलाशने का समय मांगा, लेकिन अदालत ने साफ कहा कि अब बस। याचिका में कहा गया कि 15 सेंट की मंजूरी थी, मगर 55 सेंट पर कब्जा है।
यह परिसर बहुदलीय भवन है, जिसमें पार्टी दफ्तर, नेताओं के कक्ष और एसी हॉल थे। नए भवन में शिफ्ट होने से मामला सुर्खियों में लौटा। तीन सप्ताह बाद अगली सुनवाई होगी।
केरल में सार्वजनिक संपत्तियों के राजनीतिकरण पर यह केस बहस छेड़ सकता है। राज्य को अब पुराने रिकॉर्ड उजागर करने होंगे, वरना कानूनी पेच फंस सकते हैं। पारदर्शिता की मिसाल कायम करने का मौका है।