राज्यसभा में गुरुवार को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि आत्मनिर्भर भारत केंद्र सरकार की आर्थिक नीतियों का केंद्रीय तत्व है। 2026-27 बजट चर्चा में उन्होंने घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने और ऊर्जा आत्मनिर्भरता पर बल दिया।
बजट का उद्देश्य नागरिकों को सशक्त बनाना है, जिसमें दैनिक जीवन को आसान बनाना, नौकरियां बढ़ाना, खेती की उत्पादकता सुधारना और स्थानीय क्रय शक्ति मजबूत करना शामिल है।
सीतारमण ने अर्थव्यवस्था के ‘गोल्डीलॉक्स मोमेंट’ का जिक्र किया, जहां विकास दर ऊंची है और मुद्रास्फीति नियंत्रित। यह सरकारी नीतियों, योजनाबद्धता और त्वरित फैसलों का नतीजा है।
एनएसओ के अनुमान बताते हैं कि 2025-26 में वास्तविक जीडीपी 7.4 प्रतिशत और नाममात्र 8 प्रतिशत बढ़ेगी।
स्वास्थ्य क्षेत्र में पांच सालों में एक लाख सहायक स्वास्थ्यकर्मियों को प्रशिक्षित करने की योजना है। इस वर्ष 1000 करोड़ का प्रावधान किया गया, जिससे रोजगार, बेहतर चिकित्सा सुविधाएं और मेडिकल टूरिज्म को बल मिलेगा।
शिक्षा-रोजगार-उद्यमिता के लिए शीर्ष समिति बनेगी, जो 2047 तक वैश्विक सेवा क्षेत्र में 10 प्रतिशत हिस्सेदारी हासिल करने पर काम करेगी। फोकस रहेगा आईटी, वित्त प्रौद्योगिकी, लॉजिस्टिक्स, हेल्थकेयर, पर्यटन तथा रचनात्मक उद्योगों पर।
भारत अब आत्मनिर्भरता के बल पर वैश्विक आर्थिक मंच पर मजबूत कदम रख रहा है।