गोवा में न्याय की एक बड़ी जीत दर्ज हुई है, जहां विशेष न्यायाधीश मर्सेस ने कार लोन घोटाले के दोषियों को सजा दी। केनरा बैंक के पूर्व अधिकारी वीवीएन शास्त्री और यासीन के शेख को एक वर्ष कारावास और 70 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई। दोषसिद्धि 30 जनवरी 2026 को हुई, सजा 9 फरवरी को।
2011 में शुरू हुए इस मामले की परतें खुलीं जब पता चला कि यासीन ने जाली दस्तावेजों से पोंडा ब्रांच से 5 लाख का लोन लिया। उनकी कार पहले ही उनके नाम पर थी, लेकिन शास्त्री ने आंखें मूंद लीं।
और चालाकी देखिए, कोल्हापुर ब्रांच से भी वही खेल दोहराया। पहले लोन को छिपाकर दूसरा लोन हासिल कर लिया। यह दोहरी धोखाधड़ी बैंक नियमों का खुला उल्लंघन था।
बैंक की शिकायत पर सीबीआई ने जांच की और चार्जशीट दाखिल की। अदालत ने चोरी, फर्जीवाड़ा, साजिश और गबन जैसे इल्जामों में उन्हें दोषी करार दिया।
लगभग डेढ़ दशक बाद आए इस फैसले से वित्तीय जगत में सनसनी फैल गई। यह कार्रवाई भविष्य में ऐसे अपराधों को रोकने के लिए प्रेरणा बनेगी, साथ ही बैंक अधिकारियों पर निगरानी बढ़ाने का संकेत देगी।