बजट सत्र में लोकसभा सदन हंगामे का केंद्र बन गया, जहां एनडीए के दिग्गजों ने राहुल गांधी को निशाने पर लिया। बिना तथ्य के बयान, सदन की गरिमा को चोट और परंपराओं का उल्लंघन करने के आरोपों की झड़ी लगा दी गई।
चिराग पासवान ने पद की मर्यादा पर जोर दिया। विशेषाधिकार का इस्तेमाल ऐसी बेतुकी बातों के खिलाफ संभव है।
बीएल वर्मा ने कहा कि विपक्ष निजी और संसदीय सम्मान भूल गया। बजट चर्चा में बाधा डालना गलत है, जबकि यह जनहितकारी है।
आठवले ने स्पीकर धमकी को ऐतिहासिक बताया। बयानों में कोई आधार नहीं।
संजय झा ने असत्यापित दावों पर तंज कसा। राहुल नियमों से परे होकर सदन को राजनीतिक बंधक बनाना चाहते हैं।
रेखा शर्मा ने झूठे बयानों और बदनामी का आरोप लगाया। रवि किशन ने लोकतंत्र के खतरे की चेतावनी दी।
शशांक मणि ने अनुपस्थितों पर हमलों को उजागर किया। राठौड़ ने विदेशी टिप्पणियों को राष्ट्रविरोधी कहा। शर्मा ने नियमबद्ध कार्रवाई की जरूरत बताई।
संसद का यह स्वरूप चिंताजनक है, जो विधायी प्रक्रिया को लंबे समय प्रभावित करेगा।