अंतरराष्ट्रीय संबंधों में प्रभाव के लिए सद्भावना कम पड़ती है, तकनीकी वर्चस्व जरूरी है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत को चुनिंदा क्षेत्रों में नेतृत्व ग्रहण कर दुनिया को अपनी सेवाओं पर आश्रित बनाना चाहिए।
अमेरिका की ताकत उसके अनन्य तकनीकी क्षेत्रों में है—जहां विकल्प नहीं। भारत बिना मूल्यों से समझौता किए नवाचार पर जोर दे। रेयर अर्थ, उन्नत बायोलॉजिक्स, सस्ती सैटेलाइट, ओपन-सोर्स एआई और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर पर फोकस।
ये क्षेत्र रणनीतिक निर्भरता पैदा करेंगे। आईटी, सॉफ्टवेयर, एआई, फिनटेक, बायोटेक में तेजी। इलेक्ट्रॉनिक्स, रिन्यूएबल्स, डिफेंस में मजबूती। नए क्षेत्र जैसे एआई, क्वांटम टेक, ग्रीन हाइड्रोजन में वैश्विक हिस्सा।
शिक्षा प्रणाली में क्रांतिकारी बदलाव: गहन शोध को प्राथमिकता, साहसी विचारों को प्रोत्साहन। राष्ट्रीय नवाचार मानक तय करें। इससे भारत न केवल आर्थिक बल्कि कूटनीतिक मोर्चे पर अव्वल होगा।