यूएई जेल में बंद रिटायर्ड आर्मी मेजर विक्रांत जेटली की रिहाई का केस दिल्ली उच्च न्यायालय में गरमाता जा रहा है। सेलिना जेटली की कोशिशों को पत्नी की चुनौती मिल रही है, जिस पर अदालत ने सख्त रुख अपनाया है।
सुनवाई के दौरान पत्नी के वकील को सीलबंद नोट जमा करने का हुकुम हुआ, ताकि विक्रांत की सच्ची राय बिना किसी दबाव के जानी जा सके। यह गोपनीयता मामले की जड़ तक पहुंचने में मददगार साबित होगी।
सरकार ने कोर्ट को अवगत कराया कि यूएई प्रशासन से मुलाकात की इजाजत मांगी गई और स्थानीय लॉ फर्म खालिद अल मरी को पत्र भेजा। जज ने साफ निर्देश दिया कि विक्रांत को फर्म की भूमिका ब्योरा दिया जाए।
पत्नी ने दावा किया कि सेलिना ने बिना इजाजत कोर्ट गईं और वकील चुनना उनका अधिकार है। जेल विजिट में विक्रांत ने सेलिना की फर्म ठुकराई, सरकार से वकील की मांग की।
न्यायालय ने विक्रांत को वैकल्पिक फर्म चुनने की छूट दी। विदेश मंत्रालय को याचिका कॉपी सौंपने और बहन से मिलने का मन पूछने को कहा गया। 19 फरवरी को अगली तारीख।
परिवारिक विवादों के बीच विक्रांत का केस अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में है। न्यायिक हस्तक्षेप से उम्मीदें बंधी हैं।