नई दिल्ली में राज्यसभा की कार्यवाही के दौरान कांग्रेस सांसद मल्लिकार्जुन खड़गे ने सामाजिक न्याय को संविधान का मूल मंत्र बताते हुए जाति भेदभाव पर चिंता जताई। उन्होंने जोर देकर कहा कि अब समय आ गया है कि वंचित वर्गों के लिए कथनी से करनी बने।
ओडिशा के आंगनवाड़ी केंद्र पर तीन महीने से चल रहे बहिष्कार का मामला उठाते हुए खड़गे ने कहा कि दलित महिला कुक के हाथ का बनाया भोजन कुछ लोग अपने बच्चों को नहीं खिला रहे। यह घटना बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है और संविधान के मूलभूत अधिकारों का अपमान।
खड़गे ने चेतावनी दी कि ऐसे पूर्वाग्रह बच्चों में विभेद की जड़ें जमा देंगे, जो शिक्षा और पोषण के अधिकारों को चोट पहुंचाते हैं। मध्य प्रदेश की आदिवासी घटना, गुजरात में दलित कर्मी की आत्महत्या और चंडीगढ़ पुलिस विवाद का जिक्र कर वे बोले कि यह समस्या गहरी है।
सरकार से अपील की कि हर मामले में तेज जांच हो, अपराधियों को सजा मिले और पीड़ितों को न्याय। आंगनवाड़ी केंद्रों में सामाजिक समरसता के लिए जागरूकता कार्यक्रम चलाए जाएं। खड़गे का यह संदेश सदन में गूंजा, सामाजिक सुधार की दिशा में नया विमर्श छेड़ दिया।