नेपाल की सड़कों पर जेन-जी का गुस्सा भ्रष्टाचार के खिलाफ उफान बनकर फूटा, जिसने राजनीति की दिशा मोड़ दी। 5 मार्च के लोकसभा चुनावों की तैयारियां जोरों पर हैं, भारत से सुरक्षा सहायता के साथ। अमेरिकी अधिकारी इसे दक्षिण एशिया में युवा क्रांति की कड़ी बता रहे हैं।
दक्षिण एशिया उपसमिति में पॉल कपूर ने गवाही दी कि महीनों की अस्थिरता के बाद नेपाल के साथ साझेदारी बढ़ाने को तैयार हैं। उन्होंने कहा, ‘ये युवा लहरें सत्ताधारियों को हटाकर लोकतंत्र की नई जमीन तैयार कर रही हैं।’
सितंबर 2025 के आंदोलन ने पीएम को इस्तीफा देने को विवश किया, नए चुनावों का रास्ता साफ कर दिया। कपूर ने सुरक्षित प्रक्रिया की अपेक्षा की और किसी भी सरकार के साथ सहकार्य का वादा किया।
चेयरमैन बिल हुइजेंगा ने इसे अमेरिका के लिए नया अध्याय बताया, जबकि डेमोक्रेट सिडनी ने क्षेत्रीय मांगों के अनुरूप सहायता का अवसर देखा। नेपाल का भारत-चीन के बीच स्थान इसे जियोपॉलिटिकल हॉटस्पॉट बनाता है, जहां अमेरिका संतुलन बनाए रखना चाहता है।
कुल मिलाकर, कांग्रेसी बहस से साफ है कि नेपाल का यह बदलाव वैश्विक आर्थिक हितों से जुड़ा रणनीतिक मोर्चा है।