लोकसभा विपक्ष नेता राहुल गांधी ने मजदूर संघों की राष्ट्रव्यापी हड़ताल का स्वागत किया है। एक्स पर पोस्ट के जरिए उन्होंने श्रमिकों व किसानों के आंदोलन के प्रति पूर्ण प्रतिबद्धता व्यक्त की।
देशभर में लाखों लोग सड़कों पर हैं। मजदूर चार नए श्रम कानूनों से चिंतित हैं जो उनके हक छीन सकते हैं। किसान अमेरिका संग व्यापार सौदे से कृषि-डेयरी व्यवसाय को खतरा मान रहे हैं, मनरेगा खत्म होने का डर भी है।
राहुल ने कहा कि उनके भविष्य के फैसलों में इनकी राय नहीं ली गई। ‘सरकार अब करेगी सुनवाई या किसी की चाबुक की मार ज्यादा असरदार है?’ उन्होंने मजदूर-किसान संघर्ष के साथ खड़े होने का ऐलान किया।
एसकेएम के बैनर तले विरोध तेज हो गया है। भारत-अमेरिका डील को भारतीय खेती के लिए जहर बताया गया, जो पीयूष गोयल के वादों के विपरीत है। न्यूजीलैंड, यूरोपीय संघ व ब्रिटेन के एफटीए भी चिंता का विषय बने हैं।
संगठनों ने ट्रेड नेगोशिएशन में खेती-डेयरी को सुरक्षित करने की मांग उठाई। गांधी का समर्थन आंदोलन को राजनीतिक आयाम दे रहा है, सरकार पर नीतिगत स्पष्टता का दबाव बढ़ा रहा है।
यह हड़ताल केवल हक की लड़ाई नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया की परीक्षा भी है।