एक शातिर अंतरराज्यीय गिरोह के निशाने पर था डाक विभाग का राजस्व। मुंबई एमआरए पुलिस ने नकली स्टैंप बनाने व बेचने वाले इस सिंडिकेट को ध्वस्त कर दिया। पांच गिरफ्तारियां हुईं और 27 लाख से अधिक के फर्जी टिकट जब्त कर लिए गए।
12 सितंबर 2025 को जीपीओ निरीक्षक की शिकायत पर कार्रवाई शुरू हुई। जांच में सामने आया कि गिरोह फैक्ट्री जैसे सेटअप से स्टैंप छापकर कूरियर के जरिए राज्यों में बांट रहा था।
वित्तीय जांच ने 7-8 करोड़ के संदिग्ध ट्रांजेक्शन उजागर किए। दिल्ली व उत्तर प्रदेश के सरगना लगातार लोकेशन बदल रहे थे। मुखबिरों की मदद से मुंबई पुलिस दिल्ली पहुंची।
14 दिनों की जासूसी के बाद छापेमारी में सफलता मिली। नकली स्टैंपों की कीमत 27,84,200 रुपये आंकी गई। पकड़े गए मुंबई के राकेश बिंद, बिहार के शमशुद्दीन गफ्फार व शाहिद रजा, दिल्ली के मोहम्मद शहाबुद्दीन व गाजियाबाद के वीरेंद्र प्रसाद।
पूछताछ से निर्माण प्रक्रिया व बाजार की पूरी जानकारी मिल रही है। अन्य सदस्यों की तलाश में टीमें सक्रिय हैं। मुख्य आरोपी अभी भी बेदमाग है, लेकिन पुलिस का दबदबा कायम है।