10 केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के भारत बंद के आह्वान से किनारा कर कर्नाटक की एनएफआईटीयू ने केंद्र सरकार के श्रम सुधारों का खुला समर्थन किया है। गुरुवार की राष्ट्रव्यापी हड़ताल को राजनीतिक रंग देते हुए संगठन ने हिस्सा न लेने का ऐलान किया।
अध्यक्ष वी. वेंकटेश ने कहा, ‘हमारी यूनियनें काम करती रहेंगी। सभी सुधार मजदूरों के फायदे के हैं।’ वाम दलों पर मुद्दे को राजनीतिक बनाने का तंज कसते हुए उन्होंने चार लेबर कोड्स को क्रांतिकारी बताया। प्रधानमंत्री मोदी, मंत्री मांडविया और वंदना गुरनानी के योगदान को सराहा।
वेज कोड से देशव्यापी समानता को सकारात्मक कदम कहा। जनवरी 16 की मांडविया से भेंट में पीएफ सीमा वृद्धि की मांग रखी। ट्रेनी कर्मचारियों को ग्रेच्युटी का प्रावधान पुरानी प्रथा को तोड़ने वाला बताया।
‘चर्चा का दरवाजा खुला है, हड़ताल की क्या आवश्यकता?’ वेंकटेश ने कहा। केंद्रीय बैठक से कुछ यूनियनों के बहिष्कार का जिक्र किया। सभी सेक्टरों में व्यापक असर न होने का अनुमान जताया, हालांकि वामपंथी गुट सक्रिय रह सकते हैं।
हड़ताल समर्थक दावा करते हैं कि बैंक, बिजली, परिवहन जैसी सेवाएं ठप्प होंगी। एनएफआईटीयू का रुख सुधारों की स्वीकार्यता को रेखांकित करता है, जो ट्रेड यूनियन ध्रुवीकरण को गहरा रहा है।