सिनेमा प्रेमियों के दिलों में बसे प्राण का जन्म 12 फरवरी 1920 को दिल्ली में हुआ। इंजीनियर पिता और गृहिणी मां के आशीर्वाद से उन्होंने पढ़ाई में टॉप किया, खासकर गणित में। विभिन्न शहरों में शिक्षा ग्रहण कर फोटोग्राफी के क्षेत्र में कदम रखा।
लाहौर पहुंचकर हीरा मंडी में लेखक वली से भेंट ने किस्मत खोली। 1940 की ‘यमला जट्ट’ से हीरो बने, जो ब्लॉकबस्टर रही। इसके बाद ‘चौधरी’, ‘खजानची’ और ‘खानदान’ ने पहचान दी। लाहौर में 22 फिल्में कीं, पंजाबी सिनेमा के चहेते बने।
विभाजन का कहर! मुंबई आकर 8 महीने बेरोजगारी झेली। होटल में काम किया आर्थिक तंगी में। सादत हसन मंटो व श्याम ने ‘जिद्दी’ दिलाई, जहां खलनायक बन इतिहास रचा। फिर 1940-90 तक 360+ नेगेटिव रोल्स। ‘जॉनी मेरा नाम’, ‘पूजा के फूल’ में जादू बिखेरा।
राज कपूर से राजेश खन्ना तक, प्राण अकेले टक्कर लेते। कॉमेडी, रीजनल फिल्मों में भी छाप छोड़ी। पद्म भूषण व दादासाहेब फाल्के से सम्मानित। 2013 में निधन, लेकिन सितारे कभी अस्त नहीं होते। प्राण की कहानी संघर्ष और सफलता की मिसाल है।