रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) ने फेमा 1999 के उल्लंघन के आरोप में डेक्कन डिजिटल नेटवर्क्स प्राइवेट लिमिटेड पर चल रही जांच को कंपाउंडिंग के माध्यम से बंद कर दिया। 14 जनवरी 2026 का यह आदेश धारा 15 के तहत आया, जिससे कंपनी को आगे की मुश्किलों से मुक्ति मिल गई।
मामला तब शुरू हुआ जब प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को विदेशी मुद्रा नियम तोड़ने की जानकारी मिली। 27 दिसंबर 2012 को धारा 16 के तहत शिकायत दर्ज कराई गई, जिसमें विदेशी फंडिंग की जानकारी छिपाने का इल्जाम लगाया गया।
खोजबीन से पता चला कि 11.82 करोड़ रुपये की विदेशी रकम की समय पर रिपोर्टिंग नहीं हुई। शेयर अलॉटमेंट के बाद एफसी-जीपीआर फॉर्म भी लेट जमा किया गया, जो फेमा का स्पष्ट उल्लंघन था।
कारण बताओ नोटिस 16 जनवरी 2013 को भेजा गया। कंपनी ने तुरंत कंपाउंडिंग आवेदन दाखिल किया। आरबीआई के अनुरोध पर ईडी ने कोई आपत्ति न होने की पुष्टि की, फिर 1,03,333 रुपये के एकमुश्त जुर्माने पर मुहर लग गई।
अब फेमा के तहत कोई केस या सुनवाई बाकी नहीं। यह घटना विदेशी निवेश लेने वाली कंपनियों के लिए सबक है कि रिपोर्टिंग में लापरवाही महंगी पड़ सकती है, लेकिन कंपाउंडिंग रास्ता राहत देता है।