नई दिल्ली में संसद भवन गूंजा बंगाल की क्रांति गाथा से। तृणमूल सांसद ऋताब्रत बनर्जी ने जीरो आवर में 12 निडर क्रांतिकारियों की उपेक्षा पर चिंता जताई, जो अलीपुर षड्यंत्र कांड के बाद सेलुलर जेल पहुंचे। इनकी कहानी आजादी की लड़ाई का अभिन्न हिस्सा है।
प्रमुख क्रांतिकारी बरिन घोष ने गुप्त बम कारखाने चलाए, उल्लास्कर दत्त ने धमाके तैयार किए, हेमचंद्र कानूनगो ने विदेश से विशेषज्ञता लाई। ब्रिटिश अदालतों ने इन्हें आजीवन कारावास दिया, लेकिन इनका हौसला कभी नहीं डिगा।
जेल में कठोर एकांत, थकाऊ मजदूरी और क्रूरता झेली गई। बनर्जी बोले, ‘ये वे योद्धा थे जिन्होंने बिना झुकने के लड़ाई लड़ी, दया की भीख न मांगी।’ अलीपुर ट्रायल में हत्या की साजिश और बम बनाने के इल्जाम थे।
मुजफ्फरपुर धमाके से जुड़े इस केस ने ब्रिटिश साम्राज्य को चुनौती दी। बनर्जी ने बताया कि शुरुआती कैदियों में 46 बंगाली थे। उन्होंने संसद से मांग की कि इन वीरों को उचित स्थान दिया जाए, उनकी गाथा आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचे। बंगाल का क्रांतिकारी इतिहास इन्हें भुला नहीं सकता।