अमेरिकी फर्म वर्ल्ड लिबर्टी फाइनेंशियल संग साझेदारी में डॉलर-आधारित स्टेबलकॉइन लाने की पाकिस्तान की महत्वाकांक्षा अर्थतंत्र को नुकसान पहुंचा सकती है। रिपोर्ट चेताती है कि इससे डॉलर पर निर्भरता बढ़ेगी, पाकिस्तानी रुपया ढहने की कगार पर पहुंचेगा और वित्तीय ढांचा हिलेगा।
डेली मिरर के विश्लेषण के मुताबिक, ये स्टेबलकॉइन डॉलर को संरक्षण और आदान-प्रदान का पसंदीदा बनाते हैं। नतीजा? जनता रुपये से मुंह मोड़ेगी, डॉलर की लोकप्रियता चढ़ेगी।
इससे विनिमय बाजार में प्रतिस्थापन का दबाव बनेगा, जो रुपये को अवमूल्यन के भंवर में फेंक सकता है। बार-बार की महंगाई, गिरावट और आईएमएफ निर्भरता ने पहले ही विश्वास डगमगा दिया है।
“भुगतान घाटा और नीतिगत बंधनों वाले देश में यह कदम स्थिरता नहीं, अस्थिरता लाएगा,” रिपोर्ट चेताती है।
बैंकों से तरलता का पलायन मौद्रिक नीति को कमजोर करेगा। पाकिस्तान के बैंक-केंद्रित तंत्र में ब्याज बदलाव अप्रभावी होंगे, प्रबंधन जटिल।
क्रिप्टो-विरोधी स्टेट बैंक का यह सौदा—ट्रंप कनेक्शन वाला—विदेशी नियंत्रण को वैधता देता है, आंतरिक लॉबिंग से प्रेरित।
आईएमएफ की चेतावनी: जमा लीकेज से ढांचा कमजोर। बीआईएस: संप्रभुता खतरे में। स्टेबलकॉइन निजी कर्ज हैं, जिनकी मजबूती विदेशी जारीकर्ता पर निर्भर—पाकिस्तान के बूते से बाहर।
नीतिनिर्माताओं को जोखिम आंकना जरूरी, वरना आर्थिक संकट गहरा सकता है।