राजधानी दिल्ली में राजनीतिक हलचल तेज है। शिवसेना (यूबीटी) नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने जनरल मनोज नरवणे की किताब पर छिड़े बवाल में सरकार को कायर ठहराया। उनके अनुसार, सरकारी बयानबाजी में उतार-चढ़ाव है- पहले प्रकाशन से इंकार, फिर बाजार में उपलब्धता। अनौपचारिक अगर था तो राहुल गांधी के पास कैसे?
गलवान प्रसंग पर उन्होंने जोर दिया कि कोई हताहत या कब्जा नहीं हुआ। नेताओं के सामने हुए फैसलों को सार्वजनिक करने में क्या बाधा? यह हमारा सेना प्रमुख है, पाकिस्तानी नहीं, फिर दुश्मन जैसा बर्ताव क्यों? किताब दबाना देश के लिए लज्जा की बात। चतुर्वेदी ने आरोप लगाया कि भयभीत सरकार पूर्व अधिकारियों को एफआईआर से डरा रही, ताकि सत्य न बोला जाए।
वंदे मातरम बहस को सकारात्मक बताते हुए पुरानी मनाही का हवाला दिया और बीजेपी की भूलों पर तंज। स्पीकर अविश्वास पर नियमों का उल्लेख। दिल्ली सरकार के वादों पर कटाक्ष करते हुए कहा कि सुरक्षा, सड़कें, इंफ्रास्ट्रक्चर सब लुप्त। देश की राजधानी की यह हालत दुखद और अपमानजनक है।