यूनानी चिकित्सा हमें याद दिलाती है कि शारीरिक आराम जितना जरूरी है, उतना ही मानसिक सुकून भी। ‘हरकत-ओ-सुकून नफसानी’ का सिद्धांत मानसिक गति और स्थिरता के बीच तालमेल पर जोर देता है।
शरीर थकान से बीमार होता है, मन चिंता-गुस्से से विकृत। ‘रूह’ इसकी रक्षा करती है। सकारात्मक सोच, भावनात्मक संतुलन और मानसिक ब्रेक रूह को सक्रिय रखते हैं, सेहत सुधारते हैं।
आधुनिक जीवनशैली—रातभर जागना, मोबाइल लत, अनावश्यक फिक्र—मन को कमजोर करती है। मानसिक काम जरूरी, लेकिन संतुलित। ज्यादा तो चिड़चिड़ापन, कम तो सुस्ती।
छोटे उपाय अपनाएं: एकांत में समय, गहरी सांसें, प्रार्थना, अच्छे संग। सीमाओं का पालन करें, परफेक्शन न ढूंढें।
संयम, आशावाद और विश्राम से मन शांत होता है, जो शरीर को तंदुरुस्त बनाता है। यूनानी का यह ज्ञान आज प्रासंगिक है।