नई दिल्ली में संसद के पटल पर भाजपा सांसदों ने राहुल गांधी को आड़े हाथों लिया। जनरल नरवणे की अप्रकाशित किताब को लेकर उनके दावों को फर्जी बताते हुए कार्रवाई की मांग तेज हो गई। सदन में हंगामे के बीच विपक्षी नेता की साख पर सवाल खड़े हो गए।
संजय जायसवाल ने कहा, राहुल सत्यापन का दावा करते हैं लेकिन बयान पर हस्ताक्षर तक नहीं। किताब प्रकाशित नहीं, नरवणे और पेंगुइन ने पुष्टि की। ऐसे व्यक्ति पर अनुशासनात्मक कदम उठें।
अजय भट्ट ने चेतावनी दी कि भ्रम फैलाना बंद हो। कानूनी सीमा में रहें, सदन से बाहर के विषय अवांछित हैं।
निशिकांत दुबे ने कहा, प्रकाशन कंपनी के एक्स पोस्ट से साफ है- कोई किताब नहीं। पूरी किताब पेश करें या राष्ट्र से क्षमा याचना करें।
शशांक मणि त्रिपाठी ने घटनाक्रम गिनाया। भाषण में किताब का हवाला, चुनौती पर पलटी, फिर छापी हुई कॉपी। नरवणे की पुष्टि के बाद माफी अनिवार्य। संसदीय अवरोध के लिए भी जवाबदेही।
भाजपा का आरोप है कि यह रक्षा संवेदनशील मुद्दे पर विपक्षी रणनीति है। संसदीय सत्र प्रभावित हो रहा है, सत्यनिष्ठा पर बहस छिड़ गई।