तुर्की में शरण लिए उइगर समुदाय में भय का आलम है। शिनजियांग के कथित दमन से बचकर आए 50 हजार उइगर, बिना स्थायी दस्तावेजों वाले विशेष रूप से, कहीं भी चीन निर्वासित होने के भय से परेशान हैं। वहां तो यंत्रणा, कैद और सरकारी सजा का इंतजार है।
पहले सुरक्षित माना जाने वाला तुर्की अब गिरफ्तारियों, भगाने की धमकियों और झूठे आतंकी आरोपों का केंद्र बन गया। रिपोर्ट्स में तुर्की की दोमुंही नीति उजागर हुई है—नागरिकता न होने पर कोई सुरक्षा नहीं। औरतें व बच्चे भी सुरक्षित नहीं।
शिक्षाविद अब्दुवेली अयुप के अनुसार, इस्तांबुल की एंटी-टेरर पुलिस ने 31 उइगरों को आईएसआईएस अभियान में पकड़ा। दस साल से ज्यादा तुर्कीवासी ये बिना इल्जाम के छूटे।
उसी दौरान म्यूएसर अली नामक महिला, उनके नवजात बेटे एनीस अब्दुल्लाह को इजमिर केंद्र भेजा गया। बड़े बच्चों को घर भेजा। दबाव से सात दिन बाद रिहा—कारण अज्ञात।
बीजिंग के दबाव से चीनी दूतावास उइगरों को मुखबिरी के लिए मजबूर करते हैं। परिवार पर दबाव डालकर। स्कूल, मकान, नौकरी से जीवन संवारा इन्होंने, लेकिन चीन के साथ तुर्की के रिश्ते उइगरों के भविष्य पर संकट ला रहे हैं।