लेटरन संधि ने 97 वर्ष पूर्व इतालवी धरती पर एक नया अध्याय जोड़ा। 1929 में मुसोलिनी और कार्डिनल गैस्पारी द्वारा किए गए हस्ताक्षर ने वेटिकन को独立 राष्ट्र बना दिया। यह छह दशक लंबे ‘रोमन प्रश्न’ का स्थायी हल था, जब इटली ने पोप के क्षेत्र छीन लिए थे।
विवाद की जड़ें 1870 में थीं, जब रोम इटली का हिस्सा बना। पोप खुद को कैद महसूस करते थे। पोप पायस ग्यारहवें के नेतृत्व में चर्च ने स्वतंत्रता की मांग की। संधि ने वेटिकन को अपनी सीमाएं, झंडा और कूटनीतिक अधिकार दिए।
इटली ने रोम को राजधानी माना, कैथोलिकवाद को प्राथमिकता दी और पुराने नुकसानों की भरपाई के लिए करोड़ों का भुगतान किया। पोप ने कहा कि चर्च का लक्ष्य सत्ता नहीं, बल्कि धार्मिक स्वतंत्रता है।
यह समझौता कूटनीति की मिसाल है। पोप की बुद्धिमत्ता ने टकराव को साझेदारी में बदला। आज वेटिकन सिटी वैश्विक शांति और नैतिकता का प्रतीक है। 97 वर्षों में यह संधि अपनी प्रासंगिकता साबित करती रही है।