रांची के झारखंड हाईकोर्ट में मंगलवार को अधिवक्ता महेश तिवारी ने आपराधिक अवमानना केस में बिना शर्त क्षमा याचना की। न्यायमूर्ति राजेश कुमार के साथ उनकी तीखी नोकझोंक का मामला पांच जजों की बेंच ने सुना और फैसला आरक्षित कर लिया।
पूर्ण पीठ में मुख्य न्यायाधीश एम.एस. सोनक के अलावा न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद, रंगन मुखोपाध्याय, आनंद सेन तथा राजेश शंकर थे। मूल घटना न्यायमूर्ति कुमार के चैंबर में घटी, जहां सुनवाई के दौरान तिवारी का रवैया विवादास्पद हो गया।
पूर्व में मुख्य न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष वीडियो सबूत रखे गए। तिवारी ने तब हठधर्मिता दिखाई, दावा किया कि उनकी टिप्पणियां जानबूझकर थीं और पछतावा नहीं। अदालत ने तत्काल अवमानना नोटिस थमा दिया।
सुप्रीम कोर्ट से राहत न मिलने के बाद तिवारी लौटे और माफी मांग ली। अदालत ने इसे स्वीकारते हुए आगे की कार्रवाई पर विचार सुरक्षित रखा।
यह मामला वकीलों के लिए सबक है कि अदालत की मर्यादा सर्वोपरि है। निर्णय आने पर यह स्पष्ट होगा कि माफी कितनी असरदार साबित होती है। कानूनी जगत की निगाहें फैसले पर टिकी हैं।