मुर्शिदाबाद की भरतपुर विधानसभा सीट पश्चिम बंगाल चुनावों में सबसे रोमांचक मुकाबले की उम्मीद जगाती है। ग्रामीण अर्थव्यवस्था, सीमाई स्थिति और जनसांख्यिकीय बदलाव इसे राजनीतिक तूफान का मैदान बनाते हैं।
92.49 प्रतिशत ग्रामीण मतदाताओं वाला यह क्षेत्र भरतपुर-2 ब्लॉक और भरतपुर-1 की पंचायतों पर आधारित है। उपजाऊ खेतों में धान-जूट की फसलें लहलहाती हैं। परिवहन सड़क-रेल से सुगम है, लेकिन बांग्लादेश सीमा रणनीतिक महत्व देती है।
भारतीय सांस्कृतिक नाम से विख्यात भरतपुर अब मुस्लिम बहुमत वाला है, जो सीमा प्रभाव से प्रभावित हुआ।
आरएसपी का 9 बार का दबदबा, कांग्रेस की 6 जीतें, अन्य की एक-एक। ईद मोहम्मद का लंबा राज और भट्टाचार्य का प्रभाव यादगार। 2011 से त्रस्ता: निकट मुकाबले, कांग्रेस का 2016 उलटफेर, टीएमसी का 2021 जलवा।
हिंदू मतदाताओं की कमी भाजपा को परेशान कर रही। कबीर के निष्कासन से टीएमसी कमजोर, कांग्रेस मौके ताक रही। वाम दलों का पुराना असर बरकरार।
इस बार का चुनाव सीमा मुद्दों, वोट बैंक और रणनीतियों से भरपूर होगा, जो बंगाल की सियासत का आईना बनेगा।