ऊना के क्षेत्रीय अस्पताल में क्रस्ना लैब के कर्मियों ने वेतन भुगतान में देरी से नाराज होकर मंगलवार को तीन घंटे हड़ताल पर उतर गए। हिमाचल सरकार की इस महत्वपूर्ण योजना का मकसद सस्ती मेडिकल जांच उपलब्ध कराना है, मगर निजी लैब के स्टाफ को दिसंबर-जनवरी की सैलरी नहीं मिली, जिससे उनका जीवन संकट में है।
कई कर्मचारी दूधराज जैसे दूर के इलाकों से आते हैं और ऊना में किराए पर रहते हैं। बकाया वेतन से घर का किराया, बिजली बिल, राशन और बच्चों का खर्च निपटाना असंभव हो गया। प्रबंधन ने कई बार भरोसा दिलाया, लेकिन सोमवार का वादा भी झूठा निकला। नतीजा, सुबह 9 बजे से दोपहर 12 बजे तक पूर्ण बहिष्कार।
कर्मचारियों ने कहा कि बिना पैसे के काम करना नामुमकिन है। अगर जल्द समाधान न हुआ तो संगठन राज्य कार्यकारिणी के आदेश पर बड़ा धरना देंगे। नरेंद्र कुमार ने अपनी व्यथा सुनाई कि किरायेदार बनना अब अभिशाप लग रहा, तनाव से नींद उड़ी हुई है। संजना बोलीं कि स्टडी फीस लेट हो रही, परिवार भुखमरी के कगार पर।
सीएमओ डॉ. संजीव कुमार वर्मा ने हड़ताल की जानकारी बाद में मिलने की पुष्टि की। उन्होंने आश्वस्त किया कि अस्पताल की सरकारी लैब सभी टेस्ट कर रही है, मरीज परेशान नहीं होंगे। पूरी निगरानी बरती जा रही है।
कर्मचारियों का यह विद्रोह स्वास्थ्य क्षेत्र में ठेके की व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। प्रशासन को फौरन वेतन जारी कर योजना को पटरी पर लाना होगा, ताकि जनता की सेवा प्रभावित न रहे।