हर दस में सात लोग डायबिटीज-थायरॉइड से जूझ रहे हैं, अब फेफड़ों का कैंसर भी चिंता बढ़ा रहा है। आयुष मंत्रालय ने चेताया कि हल्की खांसी को हल्के में न लें, यह कैंसर का आगमन हो सकता है।
2025 में ICMR के अनुमान से 81 हजार से अधिक पुरुष और 30 हजार महिलाएं प्रभावित होंगी। मंत्रालय की पोस्ट में लक्षणों पर जोर दिया गया है जो सांस की सामान्य परेशानियों से जुड़े प्रतीत होते हैं।
बंद न होने वाली खांसी, अकारण थकान, श्वास कष्ट, छाती दर्द और वजन ह्रास गंभीर संकेत हैं। इनकी अनदेखी निदान में बाधा डालती है।
कारण सिर्फ सिगरेट नहीं, अप्रत्यक्ष धुआं, वायु प्रदूषण और औद्योगिक जोखिम भी जिम्मेदार। सही समय पर चिकित्सा से कई जिंदगियां बच सकती हैं।
कैंसर कोशिका विभाजन की गड़बड़ी से उत्पन्न होता है। नॉन-स्मॉल सेल प्रकार भारत में प्रचलित है और उपचार योग्य, स्मॉल सेल अधिक विषम।
जागरूकता ही बचाव है। तंबाकू त्यागें, स्वच्छ वातावरण चुनें। आयुष अभियान स्वास्थ्य सुरक्षा का कवच बनेगा।