तमिलनाडु में कावेरी नदी को पुनर्जनन देने वाली 14,000 करोड़ की महत्वपूर्ण योजना चुनाव से ठीक पहले अटक गई है। नदंथाई वाझी परियोजना सिंचाई और पर्यावरण के लिए गेम-चेंजर हो सकती थी, लेकिन कागजी कार्रवाई और फंडिंग की कमी ने इसे लटका दिया।
विपक्षी एआईएडीएमके के एडप्पाडी पलानीस्वामी ने सत्ताधारी डीएमके पर ब्रेक लगाने का इल्जाम लगाया। केंद्र की मंजूरी के बावजूद राज्य सरकार चुप्पी साधे है, उनका दावा।
जल संसाधन विभाग ने सफाई दी कि विभागों के बीच तालमेल न बन पाना ही समस्या है। अधिकारी ने कहा, ’12 एजेंसियों की सहमति चाहिए। वित्तीय स्वीकृति भी लंबित। चुनाव से पहले प्रोजेक्ट ग्राउंड पर आना मुश्किल।’
पहले फेज के 934 करोड़ में केंद्र 560 करोड़ देगा, राज्य 374। मेटूर-तिरुची खंड (1092 किमी) और प्रमुख सहायक नदियों पर काम होगा। शेष हिस्सा बाद में।
किसानों का गुस्सा भड़क रहा। तिरुवरूर के रामासामी ने शिकायत की, ‘शहरीकरण ने पानी बर्बाद कर दिया। प्रदूषण से मत्स्य पालन चौपट, खेती बर्बाद।’ पुरानी रिपोर्टें भी कावेरी बेसिन की गंदगी बयान करती हैं।
परियोजना में गंदे पानी की सफाई, उद्योगी अपशिष्ट प्लांट और किनारे मजबूत करना शामिल। किसान नेता एलंकीरन ने कहा, ‘नागपट्टिनम जैसे इलाकों में एक फसल मुश्किल से। बहाली से दोहरी फसल संभव।’
यह देरी न केवल किसानों को नुकसान पहुंचाएगी, बल्कि राजनीतिक बहस को भी हवा देगी। तमिलनाडु में बड़े प्रोजेक्ट्स की राह में बाधाएं साफ दिख रही हैं।