तमिलनाडु सरकार को राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने आईना दिखाया है। तिरुवल्लुर जिले के तिरुत्तणी में ओडिशा के 20 वर्षीय मजदूर सूरज पर चार नाबालिग नशेड़ियों के हमले के बाद की घटनाक्रम ने आयोग को नोटिस जारी करने पर विवश किया।
27 दिसंबर 2025 को रेलवे स्टेशन के पास धारदार हंसिया से सूरज पर प्राणघातक हमला हुआ। अस्पताल पहुंचने पर बयान दर्ज होने के बावजूद एफआईआर में 24 घंटे की देरी हुई, जो सोशल मीडिया ट्रेंडिंग से प्रेरित बताई जा रही है।
घायल सूरज का अस्पताल से अचानक गायब हो जाना और प्रशासन की उदासीनता ने मामला गरमा दिया। सरकार का कहना है कि पीड़ित स्वयं चला गया, कोई सुराग नहीं। प्रियंक कानूनगो ने इसे प्रशासनिक निकृष्टता करार देते हुए मुख्य सचिव को नोटिस भेजा।
आयोग ने साफ कहा कि सूरज को ढूंढकर इलाज कराया जाए, मुआवजे का औचित्य स्पष्ट हो और पुलिस लापरवाही पर कार्रवाई का विवरण आए। प्रवासी श्रमिकों के अधिकारों का यह उल्लंघन असहनीय है।
देशभर में लाखों मजदूर दूसरे राज्यों में काम के लिए जाते हैं। ऐसी घटनाएं रोकने हेतु मजबूत तंत्र जरूरी है। एनएचआरसी की यह पहल सराहनीय है, जो दोषियों को सबक सिखाएगी।