एक किसान पुत्र से केंद्र के मंत्री बने राजेश पायलट की कहानी संघर्ष और साहस की है। उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में 10 फरवरी 1945 को जन्म। मेरठ से ग्रेजुएशन के दौरान दूध की डिलीवरी की, फिर वायुसेना में 1966 से पायलट बने।
इंदिरा-संजय गांधी की प्रेरणा से 1980 में भरतपुर सांसद। नाम परिवर्तन रोचक- समर्थक ने कहा, ‘पायलट ही नाम लो’। जननेता बने, खासकर किसानों के। सभाओं का सिलसिला, देशव्यापी यात्राएं- ‘हवाई मंत्री’ टैग मिला।
राव सरकार में संकट सुलझाने वाले। जेके, किसान समस्याएं, आंतरिक कलह- सब संभाला। विरोधियों ने महत्वाकांक्षी कहा, लेकिन वे अडिग। जीप प्रेमी पायलट का अंत 11 जून 2000 को हाईवे हादसे में। दौसा से लौटते ट्रॉली से भिड़ंत, एसएमएस में अंतिम सांस।
उनकी निडरता राजनीति को नई ऊर्जा दे गई।