लैंड फॉर जॉब स्कैम में सीबीआई जांच के तहत तेजस्वी यादव ने सोमवार को दिल्ली कोर्ट में हाजिर होकर हर आरोप को सिरे से नकार दिया। पूर्व उपमुख्यमंत्री ने ट्रायल लड़ने का विकल्प अपनाया, जिससे मामले की औपचारिक सुनवाई 9 मार्च से आरंभ होगी।
घोटाले का केंद्र 2004-09 का दौर है जब लालू यादव रेल मंत्रालय संभाल रहे थे। जांच एजेंसी का दावा है कि नौकरी के एवज में बिहार के कई जिलों से छोटे-छोटे प्लॉट लालू परिवार को भेंट किए गए, जो बाद में उनके नाम पर ट्रांसफर हो गए। यह एक सुनियोजित साजिश का हिस्सा था।
राउज एवेन्यू कोर्ट ने लालू, राबड़ी, तेजस्वी और तेज प्रताप को तलब किया था, परिवार को अपराधी गिरोह बताते हुए। तेजस्वी ने कोर्ट में कहा कि सभी इल्जाम झूठे और राजनीति से प्रेरित हैं। वे पूरी ताकत से केस लड़ेंगे।
कोर्ट से बाहर पत्रकारों ने तेज प्रताप के बयान पर सवाल दागे, जहां उन्होंने आरजेडी के पांच नेताओं को गद्दार कहा। तेजस्वी ने इस मुद्दे पर कुछ न बोलकर चुप्पी ओढ़ ली।
बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता के रूप में तेजस्वी की यह रणनीति पार्टी के लिए अहम साबित हो सकती है। ट्रायल के जरिए वे अपनी बेगुनाही साबित करने को बेताब हैं, जो राज्य की सियासत को नई दिशा दे सकता है।